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सरकार द्वारा को BSNL & MTNL को 4-जी के सभी चाइनीस उपकरण को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश


सरकार द्वारा  BSNL & MTNL को 4-जी के सभी चाइनीस उपकरण को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश 
सरकार द्वारा को BSNL & MTNL को 4-जी के सभी चाइनीस उपकरण को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश
सरकार द्वारा को BSNL & MTNL को 4-जी के सभी चाइनीस उपकरण को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश

जब से India - China बॉर्डर पर दोनों सेनाओं में झड़प की खबर आयी है तब से मोदी विरोधी नीच लोगों के चेहरे पर एक धूर्त मुस्कान आ गई है।
ऐसी झड़पें इसके पूर्व में भी होती रही हैं।
जब काँग्रेस की सरकार के दौरान यह सब होता था तब हम उसकी आलोचना करते थे। वैसे ही जैसे आज इतनी बड़ी घटना होने के बाद कांग्रेसी मोदी जी से सवाल पूछ रहे है।
लेकिन एक फर्क है।
जब भी भारतीय सेना पर कोई हमला होता था, हमारा कोई जवान शहीद होता था। तब हम दुख में काँग्रेस की आलोचना करते थे। यह सब होने के बाद भी काँग्रेस कुछ नहीं करती थी। सैनिकों के पास हथियार कम थे, बुलेटप्रूफ जैकेट्स नहीं थी, सरहदों तक पहूँचने के लिये सड़कें नहीं थी। हमारा विरोध सदैव इन सब पर था।
हम कभी यह कामना नहीं करते थे कि हमारा सैनिक मारा जाये या चीन अथवा पाकिस्तान हमारी सीमा में घुस जाये तो हमें काँग्रेस पर सवाल उठाने का मौका मिलेगा।
हममें इतनी नीचता कभी नहीं थी।
हमारे लिये भारतीय सेना तब भी सबसे ऊपर थी आज भी है। हमारे मन में जो काँग्रेस के लिये नफरत थी वह नफरत कभी देश या भारतीय सेना के लिये नफरत में नहीं बदली।
लेकिन आज कांग्रेस, तथा उसके पाले हुये भड़वों को देखता हूँ तो वह सारा दिन बस यही कामना करते रहते हैं कि किसी तरह पाकिस्तान हमारे ज्यादा से ज्यादा सैनिक मार दे, चीन हमारा ज्यादा से ज्यादा नुकसान कर दे, ताकी हम साबित कर पायें की प्रधानमंत्री मोदी एक कमजोर प्रधानमंत्री है।
वह प्रधानमंत्री जिसने भारतीय सेना को साजो सामान से लैश कर, शानदार ट्रांसपोर्ट कनेक्टीवीटी देकर पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत कर दिया है।
इनकी मोदी से नफरत, मोदी को नीचा दिखाने की सनक ने इन्हें राष्ट्र तथा भारतीय सेना के तक खिलाफ कर दिया है। इनकी सैनिकों के प्रति सारी चिंताएं दिखावा हैं। अधिकतर कांग्रेसी दिल ही दिल में बेहद खुश हैं।
ये कांग्रेसी मोदी सरकार से आगे की रणनीति पूछ रहे है ताकि इन पिडीजों के मालिक राहुल बाबा अपने चीनी रिश्तेदारों को भारत की रणनीति बता सकें!
जब 43 चीनी सैनिकों के मारे जाने की खबर आई तब इन सब देश के गद्दारों का चेहरा उतरा हुआ था।
हमें सिर्फ सदैव यह देखना है कि सरकारें भारतीय सेना को फ्री हैंड दे रही है या नहीं! आधुनिक हथियार, रक्षा उपकरण आदि दे रही है या नहीं। उसके बाद जो भी होना है वह बॉर्डर पर भारतीय सेना vs चीनी या पाकिस्तानी सेना के बीच होना है।
जब हमें भारतीय सेना और मोदी सरकार के साथ हर परिस्थिति में मजबूती से खड़े होना चाहिए, तब कुछ नीच लोगों के लिए बॉर्डर पर हमारे सैनिकों के जान माल का नुकसान मोदी को नीचा दिखाने का अवसर है।
चीन को एक बात बहुत अच्छे से समझ लेने की जरूरत है, यह 1962 का भारत नहीं है, ना ही अब भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू है। ये नया भारत है, इसे छेड़ोगे तो ये छोड़ेगा नहीं!
बाकी सैनिक तो हमारे तब भी शेर थे, आज बब्बर शेर है!

वित्त मंत्रालय सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल को बंद करने के पक्ष में नहीं थी लेकिन अब बहुत विचार और परामर्श के बाद मोदी सर्कार ने यह निर्णय लिए है और बीएसएनएल व् MTNL को 4 जी में उसे होने वाले सभी उपकरण पर तुरंत रोक लगाने का निर्णय लिआ है। दूरसंचार विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह संकेत दिए। यह पूछे जाने पर कि क्या वित्त मंत्रालय बीएसएनएल को बंद करने के पक्ष में है , इस पर दूरसंचार विभाग के सचिव अंशु प्रकाश ने कहा, "यह जानकारी गलत है।" दुरसंचार सचिव ने मोबाइल टावर से जुड़े उद्योग संगठन ताइपा की सालाना आम बैठक के मौके पर अलग से यह बात कही।
गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई वाले मंत्रियों के समूह ने दूरसंचार विभाग की प्रस्तावित पुनरुद्धार योजना को मंजूरी दी है। मंत्रियों के समूह ने जुलाई में घाटे में चल रही दूरसंचार कंपनियों के पुनरुद्धार के लिए प्रस्तावित पैकेज को मंजूरी दे दी थी। इस समूह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद भी थे। हालांकि , बाद में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर 80 से अधिक आपत्तियां उठा दी थीं।
दूरसंचार मंत्रालय ने बीएसएनएल के उद्धार के लिए 74,000 करोड़ रुपये की योजना का प्रस्ताव किया है , क्योंकि इसको बंद करने में भी सरकार को 95,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इस योजना में कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के लिए 29,000 करोड़ रुपये , 4 जी स्पेक्ट्रम के लिए 20,000 करोड़ रुपये और 4 जी सेवाओं को पूंजीगत खर्च के वित्तपोषण के लिए 13,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। 

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